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छत्तीसगढ और भी
बिलख पड़ीं छात्राएं हाईकोर्ट ने संज्ञान में लेते हुए कहा ऐसे नही चलेगा, शिक्षण व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई
  • Written by - amulybharat.in
  • Last Updated: 25 सितम्बर 2024,  02:16 PM IST
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हाल के मामलों, यथा स्कूल में बीयर पार्टी, DEO की फटकार से बहे छात्राओं के आंसू, दूरस्थ अंचल के स्कूलों में सैकड़ों स्कूलों में शिक्षक का आभाव, वहीं शहरी इलाके के स्कूलों में जरुरत से ज्यादा शिक्षकों की पोस्टिंग, इन सभी मामलों को हाई कोर्ट ने संज्ञान में लिया है और जनहित याचिका दायर कर जिम्मेदार अफसरों पर नाराजगी जताई है।
छत्तीसगढ़ में सरकारी स्कूलों की बदहाली को लेकर हाईकोर्ट ने उठाये सवाल, जवाब देते नहीं बन रहा है जिम्मेदार अफसरों को… रायपुर। प्रदेश में सरकारी स्कूलों की स्थिति काफी दयनीय होती जा रही है। बीते कुछ समय से ऐसे अनेक मामले सामने आये जिससे इस बात का अहसास होता है कि शिक्षण व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है और जिम्मेदार अफसरों का शिक्षा अमले पर कोई कंट्रोल नहीं रह गया है। पिछले दिनों राजनादगांव में शिक्षकों की मांग करने वाली स्कूली छात्राओं को DEO ने डांटते हुए जेल भेजने की धमकी दे दी थी। इसके बाद मीडिया से बात करते हुए छात्राएं बिलख पड़ीं। इस खबर को संज्ञान में लेते हुए हाईकोर्ट ने जनहित याचिका मानकर सुनवाई शुरू की है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस बीडी गुरु की डिवीजन बेंच में सुनवाई हुई है। हाल के मामलों, यथा स्कूल में बीयर पार्टी, DEO की फटकार से बहे छात्राओं के आंसू, दूरस्थ अंचल के स्कूलों में सैकड़ों स्कूलों में शिक्षक का आभाव, वहीं शहरी इलाके के स्कूलों में जरुरत से ज्यादा शिक्षकों की पोस्टिंग, इन सभी मामलों को हाई कोर्ट ने संज्ञान में लिया है और जनहित याचिका दायर कर जिम्मेदार अफसरों पर नाराजगी जताई है। इसका मतलब यह हुआ कि एक-एक शिक्षक के ऊपर दो-दो स्कूलों का प्रभार है। इस दौरान सरकार की तरफ से अतिरिक्त महाधिवक्ता यशवंत सिंह ठाकुर ने बताया कि प्रदेश में 297 स्कूल शिक्षकविहीन हैं, जहां वैक्लिपक व्यवस्था की गई है। इनमें से 60 स्कूलों में स्थानीय स्तर पर शिक्षकों की व्यवस्था की गई है। आसपास पोस्टेड टीचर इन शिक्षकविहीन स्कूलों में पढ़ाते हैं। इसका मतलब यह हुआ कि एक-एक शिक्षक के ऊपर दो-दो स्कूलों का प्रभार है। कोर्ट को यह भी बताया गया कि कलेक्टर और स्थानीय प्रशासन ने जानभागीदारी समिति के जरिए अस्थाई टीचर की व्यवस्था भी की है। दूरस्थ और नक्सल प्रभावित स्कूलों में शिक्षा दूत नियुक्त किए गए हैं। इस तरह की वैकल्पिक व्यवस्था पर हाईकोर्ट ने सवाल उठाया है। शासन का जवाब सुनकर हाईकोर्ट ने हैरानी जताई। चीफ जस्टिस सिन्हा ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था का ये हाल है तो कैसे काम चलेगा। कोर्ट ने सचिव से मांगा जवाब डिवीजन बेंच ने शिक्षा विभाग के सचिव को शपथपत्र के साथ यह बताने के लिए कहा है कि प्रदेश के स्कूलों में शिक्षकों की कमी दूर करने के लिए भर्ती कब तक होगी। इसके लिए चल रही प्रकिया की जानकारी भी मंगाई है। प्रकरण की अगली सुनवाई 5 अक्टूबर को होगी।

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