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क्या रायपुर बना सकता है इंदौर को चुनौती ?
  • Written by - amulybharat.in
  • Last Updated: 25 मार्च 2025,  02:26 PM IST
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स्वच्छता में सुधार के लिए भय और भावना जरूरी शहर को स्वच्छ बनाने में नगर निगम और सरकारी एजेंसियों के साथ-साथ आम नागरिकों की भी अहम भूमिका होती है। विशेषज्ञों का मानना है कि लोगों में स्वच्छता के प्रति दो चीजें जरूरी हैं— भय और भावना। भय: कचरा फैलाने वालों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। गुटखा खाकर थूकने, सड़क पर कचरा फेंकने और कूड़ेदान नहीं रखने वाले दुकानदारों पर जुर्माने का डर होना चाहिए। आम लोगों से लेकर वीआईपी तक सभी के खिलाफ नियमों के तहत सख्त कदम उठाए जाएं। भावना: जब सिस्टम खुद भ्रष्टाचार मुक्त और अनुशासित होगा, तब ही लोग स्वच्छता को लेकर जागरूक होंगे। नगर निगम और जनप्रतिनिधियों को लोगों के मन में सफाई के प्रति जागरूकता और जिम्मेदारी की भावना पैदा करनी होगी।

स्वच्छता सर्वेक्षण में पिछड़ रहा रायपुर, इंदौर से चार गुना कम संसाधन बनी बड़ी बाधा

राष्ट्रीय स्वच्छता सर्वेक्षण में 2017 से लगातार नंबर वन आ रहा इंदौर, सफाई व्यवस्था में रायपुर से काफी आगे है। दो साल पहले रायपुर इस रैंकिंग में तेजी से सुधार करते हुए छठे स्थान तक पहुंच गया था, लेकिन इसके बाद रैंकिंग में गिरावट आई और शहर टॉप-10 से बाहर हो गया। स्वच्छता सुधारने के लिए तमाम प्रयास और संसाधनों में बढ़ोतरी के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन अभी भी रायपुर इंदौर को टक्कर नहीं दे पा रहा है।

बजट और संसाधनों में भारी अंतर

स्वच्छता के कई मानकों पर रायपुर खरा उतर रहा है, लेकिन जब बजट और सफाई संसाधनों की तुलना की गई, तो चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए। इंदौर की आबादी रायपुर से दोगुनी है, लेकिन उसका नगर निगम बजट और सफाई संसाधन रायपुर से चार गुना अधिक हैं। यही वजह है कि रायपुर स्वच्छता की रेस में पिछड़ रहा है और टॉप-3 में आने की उम्मीद भी दूर होती जा रही है।

स्वच्छता में सुधार के लिए भय और भावना जरूरी

शहर को स्वच्छ बनाने में नगर निगम और सरकारी एजेंसियों के साथ-साथ आम नागरिकों की भी अहम भूमिका होती है। विशेषज्ञों का मानना है कि लोगों में स्वच्छता के प्रति दो चीजें जरूरी हैं— भय और भावना।

  • भय: कचरा फैलाने वालों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। गुटखा खाकर थूकने, सड़क पर कचरा फेंकने और कूड़ेदान नहीं रखने वाले दुकानदारों पर जुर्माने का डर होना चाहिए। आम लोगों से लेकर वीआईपी तक सभी के खिलाफ नियमों के तहत सख्त कदम उठाए जाएं।

  • भावना: जब सिस्टम खुद भ्रष्टाचार मुक्त और अनुशासित होगा, तब ही लोग स्वच्छता को लेकर जागरूक होंगे। नगर निगम और जनप्रतिनिधियों को लोगों के मन में सफाई के प्रति जागरूकता और जिम्मेदारी की भावना पैदा करनी होगी।

क्या रायपुर बना सकता है इंदौर को चुनौती?

रायपुर को स्वच्छता सर्वेक्षण में इंदौर की बराबरी पर लाने के लिए बजट और संसाधनों में इजाफा करना होगा। साथ ही, सख्त नियम और जुर्माने लागू करके स्वच्छता को अनिवार्य बनाना होगा। यदि प्रशासन और जनता मिलकर काम करें, तो रायपुर भी टॉप-3 शहरों में अपनी जगह बना सकता है।

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