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8 करोड़ की ग्रेच्युटी (उपा दान)फंसी, 300 दुर्ग निगमकर्मी दर-दर की ठोकरें खा रहे – विभागीय गिद्ध डकार रहे हक की पूंजी
  • Written by - amulybharat.in
  • Last Updated: 10 मई 2025,  09:07 AM IST
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दुर्ग नगर निगम कर्मचारियों को सेवा निवृत्ति, इस्तीफे, मृत्यु या विकलांगता की स्थिति में ग्रेच्युटी उपा दान का भुगतान मिलना अनिवार्य है – लेकिन जमीनी हकीकत इससे कोसों दूर है। पाँच वर्ष से अधिक की सेवा देने वाले करीब 300 कर्मचारी अपनी मेहनत की कमाई के लिए विभागीय कार्यालयों की चौखटें रगड़ने को मजबूर

8 करोड़ की ग्रेच्युटी (उपा दान)फंसी, निगमकर्मी दर-दर की ठोकरें खा रहे – विभागीय गिद्ध डकार रहे हक की पूंजी!

खबर: ज्वाला एक्सप्रेस न्यूज,अमुल्य भारत डाट इन  छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश की

दुर्ग। ग्रेच्युटी भुगतान अधिनियम, 1972 के तहत, नगर निगम कर्मचारियों को सेवा निवृत्ति, इस्तीफे, मृत्यु या विकलांगता की स्थिति में ग्रेच्युटी उपा दान का भुगतान मिलना अनिवार्य है – लेकिन जमीनी हकीकत इससे कोसों दूर है। पाँच वर्ष से अधिक की सेवा देने वाले करीब 300 कर्मचारी अपनी मेहनत की कमाई के लिए विभागीय कार्यालयों की चौखटें रगड़ने को मजबूर हैं।

सूत्रों की मानें तो इन कर्मचारियों को 8 करोड़ रुपये से अधिक की ग्रेच्युटी (उपा दान)का भुगतान होना है, लेकिन न तो कोई सूची सार्वजनिक की गई है, न ही प्रक्रिया पारदर्शी है। विभागीय अफसरशाही में जमे पुराने गिद्ध इसमें भी अपना फायदा देख रहे हैं और कर्मचारियों को टालमटोल कर रहे हैं।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की सरकार भले ही सुशासन का दावा कर रही हो, लेकिन नगर निगम में व्याप्त लापरवाही और भ्रष्टाचार सरकार की छवि पर सवाल खड़े कर रहे हैं। कर्मचारियों की शिकायत है कि दफ्तरों में चक्कर काटते-काटते उनकी जमा पूंजी भी घिसती जा रही है, और जवाबदेही का कोई नामोनिशान नहीं।

इस मुद्दे पर दुर्ग नगर पालिक निगम के एमआईसी सदस्य और वित्त विभाग प्रभारी नरेंद्र बंजारे ने स्पष्ट किया कि "पूर्व की प्रथा अब नहीं चलेगी। हमने संबंधित विभाग से सूची मांगी है, प्राप्त होते ही वरिष्ठता के आधार पर नाम सार्वजनिक किए जाएंगे और जल्द से जल्द निराकरण किया जाएगा।"

अब देखना ये होगा कि क्या सरकार और निगम प्रशासन वाकई कर्मचारियों के साथ न्याय करेगा या ये ‘उपादान लूट’ की कहानी यूं ही चलती रहेगी?

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