रायपुर, / चिरायु योजना बच्चों के लिए वरदान बन गई है। खासकर ऐसे परिवार जिनकी आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं है, जो दूसरे शहरों में जाकर किसी निजी अस्पताल में इलाज नहीं करा सकते। आदिवासी बाहुल्य जशपुर जहां विशेष पिछड़ी जनजाति के लोग भी निवास करते हैं। यह योजना गरीब और जरूरतमंदों के लिए सहारा बन रही है। दिल की बीमारी से जूझ रही पहाड़ी कोरवा अंजलि बाई, अंशिका, रितेश या इनके जैसे कई ऐसे बच्चे हैं जो दिल या किसी अन्य बीमारी से जूझ रहे थे। चिरायु योजना ने उन्हें नवजीवन देने का काम किया है।
जशपुर जिले के मनोरा विकासखण्ड के जंगलों के बीच बसे एक छोटे से ग्राम सोनक्यारी में विशेष पिछड़ी जनजाति पहाड़ी कोरवा परिवार में जन्मी अंजली बाई। जिनका दिल की बीमारी का इलाज चिरायु योजना से किया गया है। छोटे छोटे काम कर घर का गुजारा चलाने वाले पिता नान्हू राम को जब पता चला की अंजली के दिल में छेद है तो उन्हें समझ ही नहीं आ रहा था वह क्या करे। प्रारंभिक जांच मनोरा के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में होने के बाद चिरायु टीम के द्वारा उनका जांच किया गया। जिसमें पता चला कि अंजली के दिल में छेद है। अंजलि का रायपुर के एक बड़े निजी संस्थान में ले जाकर का उपचार किया गया। जहां सफल ऑपरेशन के बाद अंजली ठीक हो गयी।
इसी तहत जिले में कई गरीब परिवारों के बच्चे हैं जिनका सफल इलाज इस योजना के माध्यम से हुआ है। जिला मुख्यालय के पुरानीटोली निवासी सुदर्शन चौहान के पुत्र रितेश का निजी अस्पताल में जांच के बाद पता चला कि उसके दिल में छेद है। निजी अस्पताल में इलाज कराना मजदूरी करके अपने परिवार का जीवन-यापन करने वाले उनके पिता के लिए काफी मुश्किल था। फिर वे अपने बच्चे को जिला अस्पताल ले गए। जहां अस्पताल में डॉक्टरों के द्वारा चिरायु योजना की जानकारी दी गई और बेहतर इलाज के लिए रायपुर भेजा गया, जहां ऑपरेशन और बेहतर इलाज के बाद आज बच्चा स्वस्थ है। इसी तरह विकासखण्ड कुनकुरी के ग्राम बेहराटोली के निवासी कृतिबाई और धनेश्वर यादव की पुत्री अंशिका की दिल की गंभीर बीमारी का प्रारंभिक इलाज रायपुर के मेडिकल कॉलेज, सत्यसाईं चिकित्सा संस्थान एवं भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान में कराने के बाद चेन्नई स्थित अपोलो अस्पताल में अंशिका का दिल का ऑपरेशन किया गया। जिसमें कुल 14.50 लाख रुपयों का खर्च आया, जिसका वहन चिरायु योजना के अंतर्गत शासन द्वारा किया गया।
इसी प्रकार चिरायु अंतर्गत अपोलो चिल्ड्रन हॉस्पिटल चेन्नई में जन्मजात हृदय रोग से ग्रसित 2 वर्षीय अन्वी बाई, 9 वर्षीय अनंत नाायक, 9 वर्षीय कुमार नायक का सफल ईलाज किया गया। इस योजना से जिला मुख्यालय स्थित चीरबगीचा निवासी नोवेल भगत, बीटीआई पारा के गर्वित सिंह का भी रायपुर के निजी अस्पताल में जन्मजात होंठ व तालू के विकृति का निःशुल्क सफल इलाज किया गया है। उल्लेखनीय है कि चिरायु योजना के तहत आंगनबाड़ी केंद्रों, स्कूलों में जाकर बच्चों की संपूर्ण स्वास्थ्य की जांच की जाती है। जांच के उपरांत 44 प्रकार की बीमारी तथा विकृति की जानकारी होने के बाद चिरायु योजना से बच्चों का इलाज कराया जाता है। आवश्यकता होने पर बच्चों को देश भर के अच्छे हॉस्पिटल में ले जाकर उपचार भी कराया जाता है।
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