• +91 99935 90905
  • amulybharat.in@gmail.com
छत्तीसगढ और भी
रक्षाबंधन पर ब्रह्माकुमारीज ने शहरभर में बांधा परमात्मा रक्षा सूत्र
  • Written by - amulybharat.in
  • Last Updated: 8 अगस्त 2025,  08:05 PM IST
  • 1023
रक्षाबंधन पर ब्रह्माकुमारीज ने शहरभर में बांधा परमात्मा रक्षा सूत्र

-केंद्रीय जेल, वृद्धाश्रम, पुलिस बल और शासकीय संस्थानों में हुआ आध्यात्मिक रक्षा पर्व का आयोजन
दुर्ग (छत्तीसगढ़)
। प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय, दुर्ग द्वारा रक्षाबंधन के पावन अवसर पर शहरभर में आध्यात्मिक रक्षा सूत्र बांधकर प्रेम, सुरक्षा और मर्यादा का संदेश दिया गया।
यह भव्य आयोजन संस्था की संचालिका रीटा दीदी एवं रूपाली दीदी के मार्गदर्शन में आयोजित हुआ। विभिन्न स्थानों पर ब्रह्माकुमारी बहनों द्वारा रक्षाबंधन कार्यक्रम आयोजित कर परमात्म रक्षा सूत्र बांधा गया।

Image after paragraph

इन संस्थानों में हुआ रक्षा सूत्र कार्यक्रम..
विज्ञान विकास केंद्र, केंद्रीय जेल दुर्ग, वृद्धाश्रम, बाल संप्रेषण गृह, एसटीएफ बघेरा, प्रथम बटालियन, जीआरपी स्टाफ, रेलवे स्टेशन, यातायात पुलिस दुर्ग, एनसीसी, पुलिस परेड ग्राउंड, अण्डा थाना, पुलगांव थाना, मोहन नगर थाना, सिटी कोतवाली, होमगार्ड समेत अनेक शासकीय व अर्द्धशासकीय संस्थाओं में रक्षाबंधन का आयोजन किया गया।

Image after paragraph

रक्षाबंधन का आध्यात्मिक संदेश..
इस अवसर पर ब्रह्माकुमारी बहनों ने बताया कि रक्षाबंधन केवल भाई-बहन का पर्व नहीं बल्कि आत्मा की मर्यादा और सुरक्षा का भी प्रतीक है। परमात्मा शिव के दिए ज्ञान अनुसार जब आत्मा स्वयं को मर्यादा के बंधन में बांधती है, तभी उसकी सच्ची रक्षा होती है।
तिलक, अक्षत, मुख मीठा और खर्ची का आध्यात्मिक अर्थ समझाते हुए उन्होंने बताया कि तिलक आत्म-स्वरूप की स्मृति है, अक्षत आत्मा की अविनाशिता का प्रतीक है, मुख मीठा सकारात्मकता की भावना और खर्ची बुराइयों का आत्म समर्पण है।

Image after paragraph

विशेष उपस्थिति..
इस अवसर पर ब्रह्माकुमारी चैतन्य प्रभा दीदी, कामिनी दीदी, पूर्णिमा दीदी, मालती दीदी, रेणु दीदी सहित अनेक ब्रह्माकुमारी भाई-बहनों ने सक्रिय सहभागिता दी।

RO. NO 13404/ 41

RO. NO 13404/ 41

Add Comment


Add Comment

RO. NO 13404/ 41
74809102025230106banner_1.jpg
RO. NO 13404/ 41
98404082025022451whatsappimage2025-08-04at07.53.55_42b36cfa.jpg
RO. NO 13404/ 41
74809102025230106banner_1.jpg
RO. NO 13404/ 41
98404082025022451whatsappimage2025-08-04at07.53.55_42b36cfa.jpg





Get Newspresso, our morning newsletter