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अवैध प्लाटिंग पर निगम की सख्ती: कई बिल्डरों को नोटिस, तीन दिन में मांगा जवाब
  • Written by - amulybharat.in
  • Last Updated: 15 अक्टूबर 2025,  10:21 PM IST
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29 सितंबर को पार्षदों की शिकायत के बाद कलेक्टर के निर्देश पर कार्रवाई, बोरसी क्षेत्र में सबसे ज्यादा गड़बड़ी

दुर्ग। ज्वाला एक्सप्रेस न्यूज।

नगर निगम दुर्ग क्षेत्र में चल रहे अवैध प्लाटिंग और बिना अनुमति भवन निर्माण पर अब प्रशासन ने सख्ती दिखानी शुरू कर दी है। श्रीराम बिल्डर, आर.वी. हाउसिंग, अष्ट विनायक हाउसिंग, कुमावत बिल्डर, राधा बिल्डर, बत्रा बिल्डर, मल्हार बिल्डर, बालाजी बिल्डर और तिरुपति विहार सहित कई अन्य बिल्डरों द्वारा नियमों की अनदेखी कर भूखंड बेचने और मकान निर्माण करने की शिकायतें सामने आई हैं।

 

इन श्रीराम बिल्डर, आर.वी. हाउसिंग, अष्ट विनायक हाउसिंग, कुमावत बिल्डर, राधा बिल्डर, बत्रा बिल्डर, मल्हार बिल्डर, बालाजी बिल्डर और तिरुपति विहार बिल्डरों के खिलाफ पार्षदों द्वारा 29 सितंबर 2025 को कलेक्टर दुर्ग से लिखित शिकायत की गई थी। शिकायत में कहा गया था कि बोरसी, पोटिया, पटरी पार और नदी रोड क्षेत्र में बिना किसी वैधानिक अनुमति के कॉलोनियां विकसित की जा रही हैं, जहां सड़क, नाली, पानी और बिजली जैसी मूलभूत सुविधाओं का भी अभाव है।

 

इसी शिकायत के आधार पर अब नगर निगम दुर्ग ने कार्रवाई शुरू करते हुए कई बिल्डर को नोटिस जारी किया है। निगम ने जनचौपाल आवेदन क्रमांक 2100225004201 दिनांक 30 सितंबर 2025 के संदर्भ में बिल्डर को तीन दिवस के भीतर जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।

 

नोटिस में कहा गया है कि बिल्डर द्वारा नगर एवं ग्राम निवेश विभाग और नगर निगम से अनुमति लिए बिना मकान निर्माण और विक्रय किया जा रहा है, जो नगर पालिक निगम अधिनियम 1956 के प्रावधानों का उल्लंघन है। निगम ने बिल्डर से स्वीकृत लेआउट, भवन निर्माण अनुमति, कॉलोनाइजर लाइसेंस, कॉलोनी विकास अनुमति और भूमि स्वामित्व से संबंधित सभी दस्तावेज तीन दिन के भीतर प्रस्तुत करने को कहा है।

 

निगम प्रशासन ने चेतावनी दी है कि यदि निर्धारित समयावधि में संतोषजनक जवाब नहीं मिला, तो नियमानुसार आगे की कार्यवाही की जाएगी और इसकी पूरी जिम्मेदारी संबंधित बिल्डर की होगी।

इस कार्रवाई को लेकर शहर में चर्चा है कि लंबे समय से अवैध प्लाटिंग पर आंख मूंदे बैठे अधिकारियों ने आखिरकार जनप्रतिनिधियों और आम नागरिकों के दबाव में कदम उठाया है। अब देखना यह होगा कि क्या निगम वास्तव में इन अवैध कॉलोनियों पर रोक लगाता है या यह कार्रवाई सिर्फ औपचारिकता बनकर रह जाएगी।

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