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गरीबों और दिव्यांगों के नाम पर चल रही उज्ज्वला योजना जमीनी हकीकत में दम तोड़ चुकी
  • Written by - amulybharat.in
  • Last Updated: 9 फरवरी 2026,  02:40 AM IST
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उज्ज्वला योजना बना अभिशाप: दिव्यांगों से छीनी होम डिलीवरी, सरकार-अधिकारी बने मूकदर्शक उज्ज्वला योजना दिव्यांगों के लिए बनी परेशानी दिव्यांग हितग्राही को नहीं मिल रही होम डिलीवरी, कई किलोमीटर दूर से उठाना पड़ रहा है गैस सिलेंडर। एजेंसी कर रही नियमों की अनदेखी, और जिम्मेदार अधिकारी बने मौन!

दुर्ग। केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना, जिसका उद्देश्य गरीब और जरूरतमंद परिवारों को राहत देना है, दुर्ग जिले में जमीनी हकीकत में दम तोड़ती नजर आ रही है।

By -: ज्वाला प्रसाद अग्रवाल मो.9993590905

नगर निगम क्षेत्र के वार्ड क्रमांक 53 निवासी दिव्यांग जीवन दिवाकर को उज्ज्वला योजना के तहत गैस सिलेंडर लेने के लिए कई किलोमीटर दूर जाना पड़ रहा है। आरोप है कि गैस एजेंसी यह कहकर होम डिलीवरी देने से इनकार कर रही है कि “उज्ज्वला योजना में घर तक सिलेंडर पहुंचाने का प्रावधान नहीं है”, जबकि यह दावा नियमों के विपरीत बताया जा रहा है।

पीड़ित का कहना है कि दिव्यांग होने के बावजूद उन्हें हर बार भारी सिलेंडर लेने के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती है। यही स्थिति केवल एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि कई दिव्यांगजनों और गरीब हितग्राहियों की बताई जा रही है, जिन्हें लगातार होम डिलीवरी से वंचित किया जा रहा है। एजेंसियों पर आरोप है कि वे टालमटोल कर हितग्राहियों को गुमराह कर रही हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकार गरीबों को उज्ज्वला योजना के तहत मुफ्त गैस कनेक्शन और कैश ट्रांसफर की बड़ी-बड़ी बातें तो कर रही है, लेकिन धरातल पर योजना की “फीसडी” निकलती दिख रही है। जरूरतमंदों को जहां लाभ नहीं मिल रहा, वहीं राजनीतिक पहुंच रखने वाले अपात्र लोगों को भी योजना का फायदा दिए जाने के आरोप सामने आ रहे हैं।

देखे वीडियो 

उज्ज्वला योजना बनी दिव्यांगों के लिए मुसीबत

 

सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि जिम्मेदार अधिकारी जमीनी निरीक्षण करने के बजाय एजेंसियों के बताए अनुसार ही रिपोर्ट तैयार कर शासन को भेज रहे हैं। एसी कमरों से बाहर निकलकर फील्ड में जाने की जहमत तक नहीं उठाई जा रही, जिससे वास्तविक समस्याएं दबकर रह जा रही हैं

इस पूरे मामले में जब दुर्ग के खाद्य नियंत्रक अनुराग भदौरिया से संपर्क करने का प्रयास किया गया, तो उन्होंने फोन रिसीव करना भी जरूरी नहीं समझा। अधिकारियों की यह चुप्पी कई सवाल खड़े करती है और योजना के क्रियान्वयन पर गंभीर संदेह पैदा करती है।

दिव्यांग हितग्राही को नहीं मिल रही होम डिलीवरी

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