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आर्थिक तंगी से जूझते हुए झारखंड के वेटलिफ्टर बाबूलाल हेम्ब्रम एक-एक मेडल के साथ बना रहे हैं अपनी पहचान
  • Written by - amulybharat.in
  • Last Updated: 28 मार्च 2026,  02:43 PM IST
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आर्थिक तंगी से जूझते हुए झारखंड के वेटलिफ्टर बाबूलाल हेम्ब्रम एक-एक मेडल के साथ बना रहे हैं अपनी पहचान

खेलो इंडिया एथलीट बाबूलाल हेम्ब्रम झारखंड के केरिबांदा गांव से आते हैं*

*2024 में 49 किग्रा वर्ग में खेलो इंडिया यूथ गेम्स का स्वर्ण पदक जीत चुके हैं, साथ ही एशियाई और विश्व युवा चैंपियनशिप में भी पदक हासिल किए*

*अब सीनियर सर्किट में भारत का प्रतिनिधित्व करने पर नजर*

रायपुर/ जब पूर्व आर्मी कोच गुरविंदर सिंह ने बाबूलाल हेम्ब्रम को उनकी शारीरिक बनावट के आधार पर अन्य खेल छोड़कर वेटलिफ्टिंग अपनाने की सलाह दी, तब झारखंड के रामगढ़ जिले के केरिबांदा गांव के इस किशोर के सामने सबसे बड़ी चुनौती थी—इस खेल को जारी रखने के लिए पैसे जुटाना।

                लेकिन हार मानने के बजाय बाबूलाल ने निर्माण स्थलों पर बांस की लकड़ियों और लोहे की रॉड से अभ्यास शुरू किया। बाद में उन्होंने झारखंड स्टेट स्पोर्ट्स प्रमोशन सोसाइटी (JSPS) के कोचिंग सेंटर में दाखिला लिया, जिसके लिए उन्हें रोज़ 60 किलोमीटर का सफर तय कर कोच गुरविंदर के मार्गदर्शन में प्रशिक्षण लेना पड़ता था।

                बाबूलाल, जिन्होंने यहां आयोजित खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026 में पुरुषों के 60 किग्रा वर्ग में रजत पदक जीता ने कहा, “2018 में जब मैंने इस खेल को अपनाया, वह समय मेरे लिए बहुत कठिन था। हमारे पास ट्रेनिंग के लिए उपकरण और किट खरीदने के पैसे नहीं थे, इसलिए मैं बांस और लोहे की रॉड से ही अभ्यास करता था। फिर जीएसपीएस और अपने कोच का साथ मिला और आज मैं यहां हूं।”

               19 वर्षीय बाबूलाल, जो पांच भाई-बहनों में सबसे छोटे हैं, ने बताया, “मेरी मां एक स्थानीय स्कूल में रसोइया हैं और पिता छोटे-मोटे काम करते हैं। आर्थिक स्थिति हमेशा चुनौतीपूर्ण रही है। लेकिन मुझे भरोसा है कि खेलो इंडिया जैसे आयोजनों में मिल रही सफलता से हमारी स्थिति बदलेगी।”

               बाबूलाल हेम्ब्रोम ने उम्र-आधारित राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहले ही अपनी छाप छोड़ी है। 2024 में उन्होंने चेन्नई में आयोजित खेलो इंडिया यूथ गेम्स में 49 किग्रा वर्ग में स्वर्ण पदक जीता। इसके बाद उन्होंने आईडब्ल्यूएफ़ वर्ल्ड यूथ वेटलिफ्टिंग चैंपियनशिप और एशियन जूनियर एवं यूथ वेटलिफ्टिंग चैंपियनशिप में भी पदक हासिल किए। अब बाबूलाल सीनियर सर्किट में कदम रख रहे हैं और बड़े अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट्स में भारतीय टीम में जगह बनाने का लक्ष्य रख रहे हैं। फिलहाल वह पटियाला में राष्ट्रीय शिविर का हिस्सा हैं।

               बाबूलाल ने कहा, “खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स में यह रजत पदक मेरे लिए आत्मविश्वास बढ़ाने वाला है कि मैं सही दिशा में जा रहा हूं। राष्ट्रीय शिविर में लौटकर मैं अपने कोच से भविष्य के लक्ष्यों पर चर्चा करूंगा और उसी के अनुसार तैयारी करूंगा। मेरा सपना है कि मैं कॉमनवेल्थ गेम्स, एशियन गेम्स और वर्ल्ड चैंपियनशिप जैसे बड़े मंचों पर भारत का प्रतिनिधित्व करूं।”

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