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कृषि विश्वविद्यालय में 20 अप्रैल को मनाया जाएगा अक्ती तिहार
  • Written by - amulybharat.in
  • Last Updated: 19 अप्रैल 2026,  09:23 PM IST
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कृषि विश्वविद्यालय में 20 अप्रैल को मनाया जाएगा अक्ती तिहार

कृषि मंत्री श्री नेताम करेंगे मिट्टी और बीजों की पूजा

किसानों को रासायनिक उर्वरकों के विकल्प के बारे में प्रशिक्षण भी दिया जाएगा 

सभी कृषि विज्ञान केन्द्रों एवं अनुदेशन प्रक्षेत्रों में भी होगा अक्ती तिहार का आयोजन 

रायपुर, / इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय में अक्षय तृतीया के अवसर पर कल ‘‘अक्ती तिहार’’ का आयोजन किया जा रहा है। स्वामी विवेकानंद कृषि अभियांत्रिकी महाविद्यालय एवं अनुसंधान केन्द्र के पास स्थित प्रक्षेत्र में प्रातः 10ः30 बजे से आयोजित राज्य स्तरीय अक्ती तिहार समारोह के मुख्य अतिथि कृषि मंत्री श्री रामविचार नेताम होंगे। समारोह की अध्यक्षता इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. गिरीश चंदेल करेंगे। अक्षय तृतीया के अवसर पर धरती माता एवं बीजों की पूजा-अर्चना कर बीज बुआई का कार्य प्रतीकात्मक रूप से किया जाएगा। कृषि मंत्री श्री नेताम द्वारा प्रगतिशील कृषकों को कृषि आदान सामग्री का वितरण किया जाएगा। इस अवसर पर किसानों के लिए नवीन बीज बुआई तकनीकी एवं कृषि में ड्रोन का उपयोग तकनीक का प्रदर्शन भी किया जाएगा। कृषि विज्ञान केंन्द्र रायपुर द्वारा इस अवसर पर “रासायनिक उर्वरकों का विकल्प” विषय पर कृषक प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन भी किया गया है। अक्ती तिहार का आयोजन इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के अंतर्गत संचालित समस्त महाविद्यालयों, कृषि विज्ञान केन्द्रां एवं अनुसंधान केन्द्रों में भी किया जाएगा। 

उल्लेखनीय है कि अक्ती तिहार छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक परंपराओं और कृषि संस्कृति का एक महत्वपूर्ण पर्व है जो अक्षय तृतीया के शुभ दिन मनाया जाता है। यह त्यौहार केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं बल्कि हमारे कृषक जीवन की नई शुरूआत का प्रतीक है। इस दिन से खेती के नए कार्यों का शुभारंभ होता है। यह पर्व हमें प्रकृति के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने और अच्छी फसल की कामना करने का अवसर प्रदान करता है। अक्ती तिहार के अवसर पर गांवों में सभी देवी-देवताओं की पूजा-अर्चना की जाती है। ग्राम बैगा द्वारा ठाकुर देव की पूजा कर धान चढ़ाया जाता है जो हमारी पारंपरिक आस्था और प्रकृति से जुड़ाव को दर्शाता है। किसान भाई अपने घरों से धान लाकर उसका एक भाग अपनी कोठी में मिलाते हैं और शेष भाग खेतों में पूजन के साथ बुआई की शुरूआत के रूप में अर्पित करते हैं। यह परंपरा कृषि कार्य की शुभ शुरूआत का संकेत देती है।


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