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ग्रिड में भेजी गई अतिरिक्त सोलर बिजली निर्धारित दर पर खरीदी जाएगी
  • Written by - amulybharat.in
  • Last Updated: 28 जून 2026,  09:39 PM IST
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ग्रिड में भेजी गई अतिरिक्त सोलर बिजली निर्धारित दर पर खरीदी जाएगी

अगले बिजली बिलों में मिलेगा क्रेडिट

पीएम सूर्यघर योजना के रूफटॉप सोलर उपभोक्ताओं को मिलेगा अधिशेष बिजली का लाभ

रायपुर/ प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना के तहत घरों की छतों पर रूफटॉप सोलर संयंत्र लगाने वाले उपभोक्ताओं के लिए एक बेहद अच्छी खबर है। सोलर एनर्जी कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (सेकी) ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान ग्रिड में भेजी गई अतिरिक्त (सरप्लस) सोलर बिजली की खरीदी दर (बायबैक रेट) तय की है। छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी ने इस दर को अपनाने की आधिकारिक प्रक्रिया भी शुरू कर दी है।

        छत्तीसगढ़ स्टेट पावर कंपनीज़ से मिली जानकारी के अनुसार, निर्धारित दर को अंतिम अनुमोदन और मंजूरी के लिए छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत नियामक आयोग (सीएसईआरसी) के पास भेज दिया गया है। आयोग से हरी झंडी मिलते ही उपभोक्ताओं को उनकी अतिरिक्त बिजली की राशि अगले बिजली बिलों में क्रेडिट (छूट) के रूप में दिखाई देने लगेगी।

*ऐसे काम करती है नेट मीटरिंग और बायबैक व्यवस्था*

         पावर कंपनी ने इसकी पूरी प्रक्रिया को स्पष्ट करते हुए बताया। नेट मीटरिंग व्यवस्था के तहत, सोलर संयंत्र से जितनी बिजली बनती है, उसका सबसे पहले उपभोक्ता की मासिक बिजली खपत में समायोजन (अडजस्टमेंट) किया जाता है। यदि उपभोक्ता की जरूरत से ज्यादा बिजली बनती है और वह ग्रिड में वापस जाती है, तो उसकी बची हुई यूनिट हर महीने उपभोक्ता के खाते में जुड़ती चली जाती है। वित्तीय वर्ष की समाप्ति पर खाते में बची हुई इन सभी अतिरिक्त यूनिटों का नियमानुसार पावर कंपनी द्वारा बायबैक (खरीद) किया जाता है। तय दर के हिसाब से बनने वाली कुल राशि उपभोक्ता के खाते में जमा कर दी जाती है।

*नए वित्तीय वर्ष में शून्य से शुरू होता है लेखा-जोखा*

         उपभोक्ताओं के बीच भ्रम को दूर करते हुए कंपनी ने साफ किया है कि प्रत्येक नए वित्तीय वर्ष में यूनिट का लेखा-जोखा नए सिरे से (शून्य से) शुरू होता है। यही कारण है कि पिछले वित्तीय वर्ष की बची हुई अतिरिक्त यूनिट नए बिजली बिल में यूनिट के रूप में दिखाई नहीं देती हैं। हालांकि, उनका मौद्रिक मूल्य (पैसा) उपभोक्ता के खाते में पूरी तरह सुरक्षित रहता है और आगामी बिजली बिलों में क्रेडिट के रूप में घटा दिया जाता है।

        प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना के तहत अधिशेष बिजली के समायोजन और बायबैक की यह पूरी प्रक्रिया छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत नियामक आयोग के प्रचलित नियमों के तहत बेहद पारदर्शी ढंग से संचालित की जा रही है, जिससे राज्य के हजारों सौर ऊर्जा उपभोक्ताओं को सीधा आर्थिक लाभ मिलेगा।


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