इंदौर में 8 से 9 अगस्त ‘Enhancing Access to Justice’ विषय पर वेस्ट जोन रीजनल कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत समेत सुप्रीम कोर्ट और विभिन्न हाईकोर्ट के न्यायाधीश, विधिक सेवा प्राधिकरणों के अधिकारी शामिल हुए। सम्मेलन में न्याय को आम नागरिक तक आसान, समान और सम्मानजनक तरीके से पहुंचाने, मध्यस्थता और तकनीक के इस्तेमाल पर चर्चा हुई
न्याय सुनिश्चित करने के लिए सरकार प्रतिबद्ध: CM
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि राज्य सरकार सभी लोगों के लिए न्याय सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने भारतीय न्याय परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि पंच परमेश्वर की परंपरा में संवाद और समझाइश के जरिए विवादों को सुलझाने पर जोर रहा है। उन्होंने कहा कि मध्यस्थता के जरिए छोटे मामलों का समाधान कर केस पेंडेंसी को कम करने की दिशा में काम किया जा सकता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में न्याय व्यवस्था में बदलाव का दौर चल रहा है। ई-केस फाइलिंग, वर्चुअल सुनवाई, डिजिटल डेटा और आधुनिक न्याय प्रबंधन जैसी व्यवस्थाओं से न्याय प्रक्रिया को आसान बनाने का प्रयास किया जा रहा है।
पुराने कानूनों की जगह नए कानूनों का जिक्र
डॉ. यादव ने कहा कि अंग्रेजों के दौर के कई गैर-जरूरी कानूनों को समाप्त किया गया है। जनविश्वास अधिनियम के जरिए छोटे उल्लंघनों को अपराध की श्रेणी से बाहर करने जैसे कदम न्याय व्यवस्था को अधिक सरल और नागरिक हितैषी बनाने की दिशा में हैं।
उन्होंने मध्यप्रदेश में समान नागरिक संहिता से जुड़े विधेयक का भी उल्लेख किया। साथ ही पेपर लीक और धोखाधड़ी जैसे मामलों में तेजी से सुनवाई के लिए इंदौर, भोपाल, ग्वालियर और जबलपुर में फास्ट ट्रैक कोर्ट गठित किए जाने की जानकारी भी दी।
‘न्याय में देरी भी अन्याय’
मुख्यमंत्री ने कहा कि न्याय में देरी भी अन्याय के समान है। उन्होंने मालवा की न्याय परंपरा का जिक्र करते हुए लोकमाता अहिल्याबाई होलकर और सम्राट विक्रमादित्य के उदाहरण सामने रखे। उन्होंने मध्यप्रदेश में साइबर सुरक्षा, ई-जीरो एफआईआर और आधुनिक पुलिस व्यवस्था को मजबूत किए जाने की बात भी कही।
CJI सूर्यकांत बोले- संवाद से ही न्याय की पहुंच बढ़ेगी
मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि सशक्त भविष्य, गरिमा और समावेशन सिर्फ शब्द नहीं हैं, बल्कि विधिक सहायता की वास्तविक जरूरत हैं। उन्होंने कहा कि न्याय की पहुंच केवल कानून बनाने से सुनिश्चित नहीं हो सकती, इसके लिए लोगों से संवाद करना जरूरी है।
उन्होंने कहा कि गरीब, आर्थिक रूप से कमजोर, महिलाओं और वंचित वर्गों को विधिक सहायता देना किसी तरह की चैरिटी नहीं, बल्कि उनका अधिकार है।
मध्यस्थता से विवादों का समाधान
केंद्रीय विधि एवं न्याय राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने कहा कि न्याय केवल अदालतों तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि समाज के हर व्यक्ति तक इसकी पहुंच होनी चाहिए। उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 39A का उल्लेख करते हुए कहा कि आर्थिक और सामाजिक स्थिति किसी व्यक्ति को न्याय से वंचित नहीं कर सकती।
सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति विक्रम नाथ ने मध्यस्थता को विवादों के समाधान का प्रभावी माध्यम बताया। उन्होंने कहा कि परिवार, पड़ोसी और साझेदारी से जुड़े मामलों में संवाद और सहमति के जरिए समाधान निकाला जा सकता है। इस दौरान ‘विवाद से सहमति’ मध्यस्थता सर्टिफिकेट कोर्स की शुरुआत भी की गई।
ब्रेल गाइड और साइन लैंग्वेज में थीम सॉन्ग लॉन्च
कॉन्फ्रेंस में विधिक सेवा योजनाओं से जुड़ी पुस्तकों का विमोचन किया गया। इसमें ‘Ensuring Access Protecting Rights Building Futures’, ‘न्याय सबके लिए’, ‘न्याय के स्वर’ और ब्रेल लिपि में विधिक मार्गदर्शिका शामिल हैं। नालसा का थीम सॉन्ग इंडियन साइन लैंग्वेज में भी लॉन्च किया गया।
इसके अलावा Justice to Children Litigation Fellowship Programme और मध्यस्थता से जुड़े कार्यक्रमों की शुरुआत की गई।
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